शिष्यता के अनिवार्य तत्व: अध्याय 2: उद्धार को समझना
1: मैं अपने उद्धार के बारे में कैसे सुनिशिचित हो सकता हूँ
इस अध्याय का उद्देश्य अपने उद्धार के निश्चाय को समझना है| यह निश्चय प्रत्येक निश्वासी तथा उस व्यक्ति के लिए उपलब्ध है, जिसे वे सुसमचन सुनाते व् चेला बनाते है|
2: परमेशवर कौन है वह किसके समान है
इस अध्याय का उद्देश्य बाइबिल के अनुसार परमेशवर तथा उसकी विशेषताओं को समझना है|
3: बाइबिल के अनुसार आदमी को जानना
इस अध्याय का उद्देश्य मनुष्य और परमेश्वर के बीच के बाइबिल आधारित दृष्टिकोण को जानना तथा यह समझना है कि किस तरह पाप ने हमारे जीवन में निर्धारित उद्देश्य को पूरा कने में बाधा उत्पन्न की|
4: बाइबिल के अनुसार पाप क्या है
पाप के सही मतलब को समझने के लिए - भागीदारों को पाप की समस्या, वः कैसे संसार में आया वुर परमेश्वर ने संसार में पाप की समस्या को सुलझाने के लिए क्या किया, समझने की बेहद आबश्यकता है|
5: बाइबिल के अनुसार उद्धार क्या है
इस अध्याय का उद्देश्य उद्धार के सन्देश को समझना और उसे दूसरों में बाँटने के तरीके को जानना है|
6: विशवास और मैं इसे कैसे प्राप्त कर सकता हूँ
इस अध्याय का उद्देश्य विशवस् शब्द के अर्थ और बाइबिल में इसके उपयोग को अधिक गहराई से समझना ह| प्रतिभागी यह भी देख पाएंगे कि वे बाइबिल के दृष्टिकोण से अपना विशवस् किस प्रकार बढ़ा सकते है|
7: नया जन्म
इस अध्याय का उद्देश्य उन चमत्कारों पर ध्यान पकरना है जो विशवासियों के जीवन पर पड़ने वाले उसके प्रभाव को समहेगें|
8: धर्मी ठहराया जाना
इस अध्याय का उद्देश्य धर्मी ठराने के अर्थ को अधिक गहराई से समझना है, ताकि प्रतिभागी स्वय को परमेशवर के सम्मुख पवित्र व् धर्मी देख सके|
9: पवित्रता
इस अध्याय का उद्देश्य पवित्रता शब्द के अर्थ को समझना है| प्रतिभागी इस अध्याय के द्वारा समझ पायेगें कि जब वे पवित्र हो जाते है तो क्या होता है और पवित्रता की प्रक्रिया किस प्रकार कार्य करती है|
10: अनंतता
इस अध्याय का उद्देश्य बाइबिल के उल्लेखों पर आधारित मृत्यु पाशचात जीवन से सम्बंधित स्पष्ट तस्वीर प्रदान करना है, तथा इस संसारभर में पाए जाने वाले दुसते मत के लोगों से इस विषय पर चार करने के लिए प्रतिभागियों को तैयार करना है|